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International Journal of
Social Research and Development
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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
सीकर जिले के लोकगीतों में स्त्री-अनुभूति और सामाजिक यथार्थ का अंतर्संबंध: एक नारीवादी विश्लेषण
Authors
सुमन भैरी
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य सीकर जिले के लोकगीतों में निहित स्त्री-अनुभूति और सामाजिक यथार्थ के जटिल अंतर्संबंध का नारीवादी दृष्टिकोण से विश्लेषण करना है। लोकगीत भारतीय लोकसंस्कृति की वह सशक्त अभिव्यक्ति हैं, जिनमें समाज की संरचना, परंपराएँ, मान्यताएँ तथा लैंगिक संबंधों की वास्तविकता सहज रूप में परिलक्षित होती है। विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र, जिसमें सीकर जिला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र है, वहाँ के लोकगीत स्त्रियों के जीवनानुभवों, उनकी भावनात्मक संवेदनाओं और सामाजिक परिस्थितियों का जीवंत दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं। यह अध्ययन इस धारणा पर आधारित है कि लोकगीत केवल मनोरंजन या उत्सव का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे स्त्री की मौन अभिव्यक्तियों, उसके आंतरिक संघर्षों और सामाजिक बंधनों का प्रतीकात्मक एवं संवेदनशील प्रस्तुतीकरण भी करते हैं। शोध के अंतर्गत विवाह गीत, विरह गीत, तीज-त्योहारों से संबंधित गीत तथा पारिवारिक जीवन से जुड़े विविध लोकगीतों का चयन कर उनका गुणात्मक विश्लेषण किया गया है। इन गीतों में स्त्री के मनोभाव जैसे प्रेम, विरह, आशा, निराशा, पीड़ा, त्याग और सामाजिक मर्यादाओं के प्रति उसकी प्रतिक्रिया स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त होते हैं। नारीवादी दृष्टिकोण से किए गए इस अध्ययन में यह पाया गया है कि लोकगीत स्त्रियों के लिए एक वैकल्पिक अभिव्यक्ति मंच का कार्य करते हैं, जहाँ वे सामाजिक व पारिवारिक प्रतिबंधों के बावजूद अपनी अनुभूतियों को स्वर प्रदान कर पाती हैं। यह भी स्पष्ट होता है कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था के अंतर्गत स्त्री की स्थिति, उसके अधिकारों की सीमाएँ, तथा उसकी सामाजिक भूमिका लोकगीतों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परिलक्षित होती हैं। इसके साथ ही, कुछ लोकगीतों में स्त्री के आत्मबोध, उसकी आकांक्षाओं और सूक्ष्म प्रतिरोध के स्वर भी उभरकर सामने आते हैं, जो उसके सशक्तिकरण की दिशा में संकेत करते हैं।अध्ययन का निष्कर्ष यह दर्शाता है कि सीकर जिले के लोकगीत न केवल सांस्कृतिक धरोहर हैं, बल्कि वे स्त्री-अनुभूति के सशक्त वाहक भी हैं, जो सामाजिक यथार्थ को उजागर करते हुए एक वैकल्पिक इतिहास लेखन की संभावनाओं को भी जन्म देते हैं। इस प्रकार, लोकगीतों के माध्यम से स्त्री के जीवन की अनकही कहानियों, उसके संघर्षों और उसके अस्तित्व की खोज को समझा जा सकता है, जो इस शोध को ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में विशेष महत्व प्रदान करता है।
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Pages:60-65
How to cite this article:
सुमन भैरी "सीकर जिले के लोकगीतों में स्त्री-अनुभूति और सामाजिक यथार्थ का अंतर्संबंध: एक नारीवादी विश्लेषण". International Journal of Social Research and Development, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 60-65
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