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VOL. 6, ISSUE 2 (2024)
बंजारा महिलाओं की सामाजिक शैक्षिक समस्याओं का अध्ययन (मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के विशेष संदर्भ में)
Authors
मुकेश राठौर, डॉ0 शीतल झा
Abstract
इस प्रस्तुत शोध आलेख में बंजारा महिलाओं की सामाजिक शैक्षिक समस्याओं का अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के विशेष संन्दर्भ में किया गया है। जिसमें बंजारा समुदाय अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ गांव से बाहर रहते हुये अपनी विरासत से विमुख नहीं है। जो लगातार पलायन और आपराधिक जनजातियों के कलंक के कारण बंजारा समुदाय भौगोलिक रूप से अलग-थलग तो है। परंतु बंजारा समुदाय की महिलाओं और बच्चों के साथ पलायन करते हुए। जिस सामाजिक शैक्षिक चुनौतियों का सामना पलायन करने से होती है। वह बंजारा लोगों के जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। यह समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका को प्रभावित ही नहीं करता है बल्कि समुदाय का साक्षरता स्तर बहुत कम हो गया है। पारंपरिक नौकरियों और आय के स्रोत को खोने से टांडा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। परिवार और बच्चों की मुख्य संचालिका में महिलाएं खुद को सबसे ज्यादा नुकसान की स्थिति में पाती हैं। बंजारा महिलाओं से संबंधित साहित्य और महत्वपूर्ण वास्तविकताओं की समीक्षा में देखा गया है कि बंजारा समुदाय में महिलाओं की स्थिति टांडा-दर-टांडा अलग-अलग है। पिछले कुछ दशकों में क्षेत्र या अर्थव्यवस्था के विकास में उनकी भूमिका को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है। शुरुआती दिनों में, महिलाओं को पत्नियों के रूप में देखा जाता था, जिन्हें खाना बनाना, साफ-सफाई करना और बच्चों की देखभाल करना माना जाता था। इसे घरों और टांडा में समझा जा सकता है; एक महिला एक गृहिणी और देखभाल करने वाली से ज्यादा कुछ नहीं थी। महिलाओं के पास कोई निजी विचार नहीं था, कोई आवाज़ नहीं थी, और कोई आज़ादी नहीं थी। उन्हें पुरुषों की सामाजिक मान्यताओं ने कुचल दिया। एक महिला का उपयुक्त स्थान हमेशा एक पुरुष के मर्दाना ढांचे के पीछे था। हालांकि, महिलाएं बहुत सारे काम करती हैं जहां कृषि मुख्य व्यवसाय है। अक्सर उन्हें सही मायने में खेत वाली महिला कहा जाता है। जैसा कि देखा जाता है, महिलाएं आमतौर पर दो तरह के काम करती हैं, एक जो आय उत्पन्न करता है और दूसरा जो कोई आय उत्पन्न नहीं करता है। पहला घर के बाहर का काम है जिसके लिए उसे भुगतान किया जाता है; और दूसरा आर्थिक गतिविधि नहीं माना जाता है, क्योंकि यह भुगतान वाला काम नहीं है। घरेलू काम जैसे खाना बनाना, सफाई करना और बच्चों की देखभाल, पशुओं का रखरखाव, ईंधन, चारा, पानी और वन उपज आदि इकट्ठा करना घर में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला अवैतनिक श्रम है। परिवार अपनी आय को किस तरह खर्च करता है, इसमें उनकी बहुत कम या कोई भूमिका नहीं होती है। वैसे तो बंजारा महिलाओं की रंगीन जिंदगी उनकी बाहरी दुनिया की तरह दिखती है, लेकिन तांडा और घर के अंदर उन्हें हर तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस शोध के माध्यम से शोधकर्ता ने बंजारा महिलाओं की सामाजिक शैक्षिक समस्याओं को मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के विशेष संन्दर्भ में किया गया है जो खरगोन जिला की छह जनपद पंचायतों- झिरन्या, भीकनगावं, भगवानपुरा, बडवाह ब्लॉक, गोगावां, महेश्रर में से प्रत्येक जनपद पंचायतों में बंजारा समुदाय की महिलाओं की सामाजिक शैक्षिक समस्याओं पर केन्द्रित अध्ययन है।
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Pages:38-41
How to cite this article:
मुकेश राठौर, डॉ0 शीतल झा "बंजारा महिलाओं की सामाजिक शैक्षिक समस्याओं का अध्ययन (मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के विशेष संदर्भ में)". International Journal of Social Research and Development, Vol 6, Issue 2, 2024, Pages 38-41
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