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International Journal of
Social Research and Development
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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
भारत मे महिला विधिक अधिकार : पंचायती राज के संदर्भ में
Authors
सुनिता चौधरी
Abstract
भारत में महिला विधिक अधिकारों की स्थिति सशक्त एवं महिलाओं के स्तर को ऊपर उठाने के लिये सरकार निरन्तर प्रयासरत है। स्वतंत्रता से वर्तमान तक महिलाओं की उन्नति के लिये और समुचित न्याय दिलाने हेतु सरकार एवं स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा निरन्त विधिक अधिकार एवं संरक्षण प्रदान किये जाते है। लेकिन इन सब के बावजूद भी ऐसा महसूस होता है कि महिला वर्ग इन सब प्रयासों से लाभान्वित नहीं हो पा रही है। इसके पीछे महिलाओं की अज्ञानता एवं रूढिवादिता आदि। इन्हीं कारणों से महिलाएं सरकार द्वारा बनाये गये कानूनों को पूर्णत: नहीं जान पाती है और यदि आस-पास से कुछ जानकारी ग्रहण कर भी लेती है तो परिवार एवं समा के कट्टरपंथी सोच के कारण महिलाएं आगे अग्रसर नहीं हो रही है। इसमें कोई संशय नहीं है कि वह लाभान्वित भी होती है, लेकिन आगे आने वाली महिलाओं की संख्या नगण्य ही है। इसलिये समाज के जाग्रत वर्ग का यह दायित्व है कि वह महिलाओं के इस वर्ग को इनके अधिकरों के प्रति जाग्रत एवं सशक्त बनाये । तथापि उपर्युक्त संवैधानिक प्रावधानों के अतिरिक्त संविधान द्वारा प्रदत्त विधियों द्वारा भी महिला अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया गया है। इन उपयुक्त अधिनियमों के क्रियान्वयन से महिलाओं की वैधानिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत हुई है। यद्यपि कानून ने महिलाओं को अनेक प्रकार की सुरक्षात्मक व्यवस्थाए दी है, किन्तु इन कानूनों का सही परिप्रेक्ष्य में प्रभावी क्रियान्वयन के परिणाम नगण्य है वस्तुतः भारतीय संविधान में कानून के शासन की बुनियादी प्रतिबद्धता महिला और पुरूष समानता में अन्तर्निहित है जो महिलाओं के अधिकार पूर्ण सशक्तिकरण में कितने सफल हो पायेंगे, इसका जबाव भविष्य के गर्भ में है।
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Pages:83-86
How to cite this article:
सुनिता चौधरी "भारत मे महिला विधिक अधिकार : पंचायती राज के संदर्भ में". International Journal of Social Research and Development, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 83-86
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