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VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
ग्राम पंचायतों का वित्तीय प्रबंधन: बिहार राज्य के सन्दर्भ में
Authors
डा. धीरज कुमार
Abstract
वर्तमान में, पंचायतें ग्यारहवी सूची में सूचीबद्ध आर्थिक-सामाजिक विकास से संबंधित विभिन्न विषयों पर योजनाएं बनाकर व उनके सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करते हुए गांवों में विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहीं हैं। गांवों में कृषि विकास व विस्तार, पशुपालन, मत्स्य पालन, वन विकास, लघु व कुटीर उद्योगों के विकास का भार पंचायतों के कंधों पर ही है। गांवों में सफाई, स्वच्छता, चिकित्सा, शिक्षण व्यवस्था, बिजली, पानी व सिंचाई जैसी आधारभूत सुविधाओं का प्रावधान पंचायती संस्थाओं के द्वारा किया जाता है। इसके साथ ही महिला वर्ग, गरीब वर्ग व पिछड़े वर्ग के कल्याण हेतु विभिन्न कार्यक्रमों के क्रियान्वयन एवं सामुदायिक परिसम्पत्तियों के निर्माण, रखरखाव व देखभाल की जिम्मेदारी पंचायतों पर ही है। इस प्रकार से, पंचायती संस्थाएं गांवों को सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से सशक्त बनाकर उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध हैं।
पंचायती राज व्यवस्था भारतीय ग्रामीण समाज की रीढ़ है। वर्तमान में पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक न्याय एवं आर्थिक विकास की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। पंचायती व्यवस्था का मूलभूत लक्ष्य यही है कि गांवों से पुरानी व्यवस्था को परिवर्तित करके एक ऐसे समतामूलक समाज की रचना की जाए जिसमें असमानता, अन्याय व शोषण की लकीरें विद्यमान नहीं हो। समाज के सभी जाति, वर्ग, महिला व पुरुष एवं बालकों के अधिकारों को संरक्षित व सुरक्षित करना संभव हो सके। बेरोजगारी, गरीबी व भुखमरी जैसे दानवों से मुक्त गांव स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय के प्रतिबिम्ब हों। इस प्रकार से सामाजिक न्याय एवं आर्थिक विकास के मार्ग पर प्रशस्त गांव ही देश के विकास की वास्तविक तस्वीर के प्रत्यक्ष साक्षी होंगे तथा इस दुष्कर व जटिल कार्य के सम्पादन में पंचायतों की भूमिका सर्वोपरि एवं महत्वपूर्ण साबित होगी।
वित्तीय दृष्टिकोण से सशक्त होने पर ही पंचायतै गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में सफलता हासिल कर सकती हैं। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए पंचायतों को शुल्क, चुंगी व फीस आदि लगाने व संगृहित करने का अधिकार दिया गया तथा राज्य सरकार की आकस्मिक निधि से भी वित्तीय व्यवस्था का प्रावधान किया गया ताकि पंचायतों को वित्तीय मजबूती उपलब्ध हो सके। प्रस्तुत आलेख में बिहार राज्य के सन्दर्भ में ग्राम पंचायतों के वित्तीय प्रबन्धन के पहलुओं को समाविष्ट करने का प्रयास किया गया है।
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Pages:89-92
How to cite this article:
डा. धीरज कुमार "ग्राम पंचायतों का वित्तीय प्रबंधन: बिहार राज्य के सन्दर्भ में". International Journal of Social Research and Development, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 89-92
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