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International Journal of
Social Research and Development
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VOL. 7, ISSUE 1 (2025)
सतत विकास लक्ष्य के परिप्रेक्ष्य में भारतीय नीतियों का विश्लेषण
Authors
डॉ0 सपना
Abstract
विकास और प्रगति की राह में भारत ही नहीं अपितु वैश्विक समुदाय का प्रत्येक वर्ग (महिला, बच्चे, गरीब, अमीर, हासिये पर स्थित लोग, पर्यावरण, संस्कृति आदि) की सक्रिय सहभागिता अपरिहार्य है। महत्वपूर्ण यह है कि विकास अपने साथ विनाश लेकर आता है, जिसके अन्तर्गत विनाश, हमारी सम्भावनाओं का, विनाश हमारी सुख शांति का अन्तर्निहित होता है। यूरोप में औद्योगिक क्रांति द्वारा जनित विनाशकारी सम्भावनाओं की परिणति हम परमाणु हथियारों के साथ-साथ हिरोशिमा और नागाशाकी के रूप में देख सकते हैं। इतना ही नहीं वैश्विक तापन, जलवायु परिवर्तन, ओजोन क्षरण आदि जैसी घटनायें इन्ही विकास प्रक्रियों के ही दुष्परिणाम हैं। इस सन्दर्भ में वैश्विक स्तर पर एक सराहनीय पहल की गयी, ’सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य’ के रूप में, जिसके अन्तर्गत कुल 8 उद्देश्य एवं 18 लक्ष्य निर्धारित किये गए थे। इसके उपरान्त ’सतत विकास लक्ष्यों’ की घोषणा सन् 2014 में की गयी तथा इन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु 15 वर्ष का लक्ष्य रखा गया, जिसकी अन्तिम तिथि 31 दिसम्बर 2030 है। भारत सरकार द्वारा विभिन्न नीतियों, कार्यक्रमों एवं योजनाओं के माध्यम से इस ओर विभिन्न सार्थक कदम उठाये जा रहे हैं, जिससे कि सन् 2030 में सतत विकास सम्बन्धी लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
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Pages:1-4
How to cite this article:
डॉ0 सपना "सतत विकास लक्ष्य के परिप्रेक्ष्य में भारतीय नीतियों का विश्लेषण". International Journal of Social Research and Development, Vol 7, Issue 1, 2025, Pages 1-4
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