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International Journal of
Social Research and Development
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VOL. 6, ISSUE 2 (2024)
सुभाषचन्द्र बोस का सामाजिक-आर्थिक चिंतनः एक दृष्टिकोण
Authors
सुनील कुमार पाण्डेय
Abstract
भारत एक विचारशील एवं मूल्यों से परिपूर्ण संस्कृति का राष्ट्र रहा है। इसके अपने विकास की एक गौरवगाथा रही है। स्वतन्त्रता आंदोलन के दौरान हमारे महापुरुषों ने अपने कालजयी प्रयासों से एक सक्षम एवं गौरवमयी भारत की तस्वीर प्रस्तुत की जो उनके सपनों का भारत था। इन्हीं में एक युगद्रष्टा सुभाषचन्द्र बोस ने भारत के स्वतन्त्रता आंदोलन में एक तरफ राजनीति क्रांतिकारी एवं प्रखर राजनीतिज्ञ की भूमिका अदा की, वहीं भविष्य के समर्थशाली भारत का सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से उन्नत स्वरूप कैसा होना चाहिए, इसका पैमाना भी उन्होंने प्रस्तुत किया। भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता, समाजवादी सामाजिक-आर्थिक ढाँचा, उद्योगीकरण, कृषि, शिक्षा, मानव संसाधन, स्त्रियों की क्षमता एवं भाषाई एकता जैसे भारत के महत्त्वपूर्ण सामाजिक पक्षों पर अपने विचार एवं लक्ष्यों को प्रस्तुत किया। जिन प्रमुख लक्ष्यों की प्राप्ति की सुभाषाचन्द्र बोस ने कल्पना की थी आज भी भारत इन्हीं आदर्शों को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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Pages:11-13
How to cite this article:
सुनील कुमार पाण्डेय "सुभाषचन्द्र बोस का सामाजिक-आर्थिक चिंतनः एक दृष्टिकोण". International Journal of Social Research and Development, Vol 6, Issue 2, 2024, Pages 11-13
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