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International Journal of
Social Research and Development
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VOL. 6, ISSUE 1 (2024)
सइबर अपराध: महिलाओं के विशेष संदर्भ में
Authors
डॉ. बलभद्र प्रसाद देवांगन
Abstract
सभी क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। साइबर अपराध का शिकार होना किसी भी महिला के लिए सबसे दर्दनाक अनुभव हो सकता है। खासकर भारत में, जहां समाज महिलाओं को हेय दृष्टि से देखता है, और कानून साइबर अपराधों को ठीक से पहचान तक नहीं पाता है। प्रस्तुत शोध पत्र में विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों पर चर्चा करने की जो एक महिला पर हो सकते हैं और वे उस पर कैसे प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (2000) और संवैधानिक दायित्व जैसे मामलों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए मौजूद विभिन्न कानूनों की भी संक्षेप में जांच की जायेगी। निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए साइबर अपराध के विभिन्न प्रतिष्ठित मामलों (रितू कोहली का मामला 2001) की सहायता ली जायेगी। महिलाओं पर साइबर अपराध में हालिया वृद्धि और इसके विभिन्न कारणों पर भी विस्तृत समीक्षा कर भारत में महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ते साइबर अपराध का सामना करने के लिए कई उपाय सुझाने की भी योजना कर कार्य किया जावेगा। अपने निष्कर्ष पर साइबर अपराध के पीड़ितों के लिए उपलब्ध विकल्पों और साइबर अपराधियों के बढ़ते हौसलों पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने के लिए कानूनी प्रणाली में आवश्यक बदलावों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। शोध का प्रमुख उद्देश्य वर्तमान का विश्लेषण करना है। महिलाओं की सुरक्षा हेतु भारत में साइबर सुरक्षा का परिदृश्य और इसके लिए विशिष्ट कानून लाने की आवश्यकता है। इस शोध की प्रमुख उद्देश्य साइबर अपराध के विरुद्ध अधिक विशिष्ट नीतियां और कानून लाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालना है, साथ ही सोशल मीडिया नेटवर्क और निजी साइटों पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले प्रत्येक विशेष अपराध के लिए विशिष्ट कानून में वृद्धि लाने के लिए सरकार को प्रयास करना आवश्यक है।
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Pages:76-78
How to cite this article:
डॉ. बलभद्र प्रसाद देवांगन "सइबर अपराध: महिलाओं के विशेष संदर्भ में". International Journal of Social Research and Development, Vol 6, Issue 1, 2024, Pages 76-78
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