Logo
International Journal of
Social Research and Development
ARCHIVES
VOL. 4, ISSUE 2 (2022)
गांधी का स्वाराज एवं सुशासन की अवधारणा
Authors
धर्मेन्द्र चैधरी
Abstract
गांधीजी चाहते थे कि स्वराज का निर्माण सत्य और अहिंसा के आधार पर हो। वे ऐसे स्वराज का सपना देखते थे जो सत्य के रूप में पूर्ण विकेन्द्रीयकरण हो । वर्तमान सुशासन की अवधारणा गांधीजी के स्वराज संबंधी विचारों पर ही आधारित है, क्योंकि गांधीजी के स्वराज में किसी भी प्रकार के लिंग, धर्म, जाति, प्रदेश, रंग, सम्पत्ति की अनुचित असमानताएं नहीं है, इसमें राजनीतिक संस्थाऐं और भूमि जनता की है । इसमें प्रत्येक व्यक्ति सभी स्वतन्त्रताओं का जैसे भाषण, समुदाय, धर्म, व्यवसाय, प्रेस की स्वतन्त्रताओं का उपयोग करता है। इसमें स्वःनियन्त्रित नैतिक प्रतिबन्ध है। इस प्रकार स्वराज में ग्राम और ग्राम समुदाय स्वशासन, स्वावलम्बी और अपने आप में पूर्ण है । सुशासन का मुख्य उद्देश्य भी समाज का विकास एवं समाज को स्वतन्त्र रूप से सहायता प्रदान करना है। गांधीजी के स्वराज की अवधारणा की तरह ही सुशासन में जनता के मूल्यों का समान, जनता के प्रति सेवाभाव, उत्तरदायित्वपूर्ण एवं कार्यकुशल राजनीतिक सत्ता, पारदर्शी न्याय व्यवस्था आदि विचारों की प्रधानता रही है।
Download
Pages:6-8
How to cite this article:
धर्मेन्द्र चैधरी "गांधी का स्वाराज एवं सुशासन की अवधारणा". International Journal of Social Research and Development, Vol 4, Issue 2, 2022, Pages 6-8
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.