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VOL. 3, ISSUE 2 (2021)
भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का विकास और महत्व: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
Dr. Kan Raj Pooniya
Abstract
भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों को लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की आधारशिला के रूप में स्थापित किया गया है। ये अधिकार नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता और गरिमा के साथ जीवन जीने की गारंटी प्रदान करते हैं तथा राज्य की शक्तियों पर संवैधानिक नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य मौलिक अधिकारों के ऐतिहासिक विकास, उनके संवैधानिक स्वरूप तथा उनके व्यावहारिक महत्व का विश्लेषण करना है। मौलिक अधिकारों की अवधारणा का विकास विभिन्न ऐतिहासिक और राजनीतिक परिस्थितियों के प्रभाव में हुआ है।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान नागरिक अधिकारों की मांग ने इन अधिकारों को विशेष महत्व प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप संविधान में इन्हें एक केंद्रीय स्थान दिया गया। समय के साथ न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका और विभिन्न संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से इन अधिकारों का दायरा विस्तृत हुआ है, जिससे वे अधिक प्रभावी और व्यापक बने हैं। मौलिक अधिकार केवल विधिक प्रावधान नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए अनिवार्य तत्व हैं। वर्तमान संदर्भ में भी ये अधिकार नागरिकों को राज्य के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करते हैं और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करते हैं।
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Pages:64-67
How to cite this article:
Dr. Kan Raj Pooniya "भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का विकास और महत्व: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Social Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2021, Pages 64-67
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